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सतयुग और कलयुग लाने में मनुष्य जाति का बहुत बड़ा योगदान है :डाक्टर एमपी सिंह






















अरुणोदय उत्कर्ष /अरूण सिंह चंदेल, फरीदाबाद, 14-दिसम्बर2019-देश के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद समाजशास्त्री दार्शनिक प्रोफेसर एमपी सिंह ने इस आर्टिकल के माध्यम से जन जागरण करने की कोशिश की है और कहा कि सतयुग और कलयुग लाने में मनुष्य जाति का बहुत बड़ा योगदान है लोभ मोह अहंकार काम क्रोध को साथ लेकर चलने पर कलयुग का आनंद आता है और इनको छोड़ने पर सतयुग का आनंद आता है डॉक्टर एमपी सिंह ने कहा कि हम अधिकतर दूसरों को बदलने में लगे रहते हैं स्वयं अपने आप को बदलना नहीं चाहते हैं यदि हम अपने आप को दुरविचार दुर्व्यवहार लानेसे दूर रखें तो पवित्र आत्मा बन सकती है जब हम निर्विकारी होंगे तो हमारा परिवार भी सद्गुणों को अपना कर अपने जीवन को सफल बनाएगा और उन पवित्र आत्माओं का प्रभाव पास पड़ोस में भी पड़ेगा जिससे पड़ोस में सद्गुणों को अपनाकर विकारों से मुक्त शांत व सुखी जीवन यापन कर पाएगा फिर सभी आत्माओं से राष्ट्र का कल्याण होगा शांति रहेगी जो आज चारों तरफ दुराचार व्याधिचार अनाचार दिखाई दे रहा है वह समाप्त हो जाएगा सभी के साथ और सहयोग से पॉजिटिव वाइब्रेशन होंगी जिनमें भटकती आत्मा भी ठीक हो जाएगी आज हम अधिकतर दूसरों की चुगली और निंदा करते हैं अखबारों व पुस्तकों मैं गलत करिकुलम पढ़ते हैं टेलीविजन पर गलत चित्र देखकर वह गलत भाषा सुनकर प्रसन्न होते हैं मोबाइल पर गलत सीन देखकर व गलत विचारों को सुनकर अपना बहुमूल्य समय बर्बाद करते हैं और गलत मानसिकता का शिकार हो जाते हैं जिसका बुरा प्रभाव समाज में देखने को मिलता है जिनकी वजह से बलात्कार चोरी डकैती लूटपाट मारपीट मर्डर आदि परिदृश्य देखने को मिल जाते हैं इन पर रोक मोमबत्ती जलाने भाषण देने ज्ञापन देने से नहीं बल्कि मानसिकता को बदलने से होगी जब हमारी दृष्टि में गलत दोष नहीं होगा मन में गलत विचार नहीं आएगा हम आपस में अश्लील और असभ्य भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे हंसी मजाक में अपशब्दों का प्रयोग नहीं करेंगे तो मानसिक रोगी नहीं होंगे मानसिकता खराब होने की वजह से ही हम चिल्लाकर बोलते हैं दूसरों को अपने दवाब में रखना चाहते हैं अपने सामने दूसरों को कुछ नहीं समझते दूसरों की जमीन जायदाद को हड़पने की कोशिश करते हैं बहन बेटी की इज्जत को तार-तार कर देते हैं जघन्य अपराधों को जन्म देते हैं नियम कानूनों की अवहेलना करते हैं जल और वायु को प्रदूषित करते हैं अपने अवगुणों व दोषों को दुनिया पर मढते हैं बड़े छोटों की इज्जत नहीं करते हैं बोली भाषा का सलीका नहीं होता है व्यवहार कुशल नहीं होते हैं नशा खोर सूदखोरों की टीमों का गठन करके गरीबों असहयोग का शोषण करते हैं जब हम मेडिटेशन करते हैं और सद्गुणों को अपनाते हैं अच्छी पुस्तकों को पढ़ते हैं और अच्छी वाणी सुनते व बोलते हैं अच्छा वीडियो देखते हैं तो मन शांत व पवित्र हो जाता है और सतयुग लगने लगता है डॉ एम पी सिंह ने कहा कि सब कुछ व्यक्तिगत पर निर्भर करता है नकारात्मक और सकारात्मक उसकी सोच के परिणाम होते हैं कुछ लोग स्वयं तो बदलना नहीं चाहते और दूसरों को बदलने का प्रयास करते हैं जोकि निरर्थक है रेप जैसे जघन्य कुकृत्यों से बचने के लिए सद्गुणों को अपनाना होगा और प्रदूषण मुक्त भारत के लिए स्वयं से पहल करनी होगी दोषारोपण किसी भी समस्या का समाधान नहीं है बल्कि अपने काम को अपने आप मन से करना चाहिए अपने घर की साफ सफाई अपने आसपास की सफाई करके गंद को डस्टबिन में डाल कर स्वच्छता का संदेश दिया जा सकता है जब हम सभी उक्त गुणों को अपना लेंगे तो प्रदूषण मुक्त स्वच्छ भारत बन जाएगा उक्त विचार डॉक्टर एमपी सिंह के अपनी स्वतंत्र विचार हैं इसमें क्रिया प्रतिक्रिया की जरूरत नहीं है

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