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दार्शनिक प्रोफेसर एमपी सिंह ने हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा

















12 जनवरी 2020 को संस्कार की पाठशाला नामक प्रोग्राम के तहत देश के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद समाजशास्त्री दार्शनिक प्रोफेसर एमपी सिंह ने हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा की हम भारत देश में पैदा हुए हैं यानी हम हिंदुस्तानी हैं हमारी मातृभाषा हिंदी है हमें हिंदी से प्यार होना चाहिए और हिंदी भाषा का सम्मान करना चाहिए कुछ लोग अपनी माता जी को अम्मा जी नहीं कहते हैं मॉम कहकर बुलाते हैं और बाबा चाचा दादा पापा को डैड और अंकल के नाम से पुकार कर गौरवान्वित महसूस करते हैं जोकि अत्यंत खेद का विषय है आज भारतवर्ष में चारों तरफ व्हाट्सएप और फेसबुक सिर चढ़कर बोल रहा है चाहे घर में रहने वाले भाई-बहन माता-पिता कोई भी हो सभी एक साथ बैठकर भी आपस में संवाद नहीं कर पाते हैं होटल क्लब पार्टी आदि के दौरान भी यही देखा जाता है कि सभी अपने अपने मोबाइल पर लगे हुए होते हैं जिससे हमारे समय का विनाश तो हो ही रहा है बल्कि सभ्यता और संस्कृति भी खत्म होती जा रही है पहले माता पिता विद्वानों वीरांगना महापुरुषों क्रांतिकारियों महान आत्माओं के बारे में बचपन में ही बता दिया करते थे जिससे बच्चा सौर्यबान तेजपाल बलवान विद्वान कीर्तिमान चरित्रवान देशभक्त मातृ पितृ भक्त आदरणीय सम्मानीय बन जाता था बचपन में ही महाराणा प्रताप छत्रपति शिवाजी झांसी की रानी मीराबाई तुलसी सीता सतवंती श्रवण कुमार राजा हरिश्चंद्र भक्त मोरध्वज रामायण से संबंधित अनेकों चरित्रों की कहानियां सुनाकर बच्चों में कूट-कूट कर गुण भर देते थे जिसके कारण कभी भी बच्चा अपने जीवन में अपने माता-पिता को वृद्धा आश्रम में नहीं भेजता था और बहन बेटी को गलत दृष्टि से नहीं देखता था उत्तम संस्कारों की वजह से दूध मुखी बच्चियों के साथ बलात्कार भी नहीं होते थे डॉ एम पी सिंह का कहना है कि हम बाई चांस इंडियन नहीं है हम बाई बर्थ इंडियन है और बाई चॉइस भी इंडियन है हम अपनी काबिलियत को किसी अन्य देश मैं नहीं देना चाहते हैं अपने वतन के लिए जीना और मरना चाहते हैं डॉक्टर एमपी सिंह का कहना है कि जो लोग भारत देश में नफरत फैलाते हैं दंगों को भड़काते हैं मशलूमो को सताते हैं वह देश के गद्दार लोग हैं उनको हिंदुस्तान छोड़ देना चाहिए जिन भारतीय लोगों को हिंदी बोलने पढ़ने और सुनने में शर्म आती है उनको भी भारत छोड़ देना चाहिए विकृत मानसिकता के लोगों के लिए भारत में कोई जगह नहीं है जो लोग पश्चिमी सभ्यता को अपना रहे हैं और पाश्चात्य सभ्यता पर चल रहे हैं उनको भी भारत छोड़ देना चाहिए जो हमारी भारतीय सभ्यता संस्कृति है उसको अपना कर एकता बनाकर राष्ट्र की उन्नति के लिए समर्पित होकर हम सभी को काम करना चाहिए हमें अपने पुराने इतिहास से सीख लेनी चाहिए कि भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था लेकिन इस देश की आपसी फूट के कारण पुर्तगाली फ्रांसीसी डच अफगानी यूरोपियन मंगोल मुगल अंग्रेजों ने लूटा और शासन किया पहले छोटी-छोटी विरासत थी जब एक विरासत लूट रही होती थी तो अन्य रियासतों के राजा महाराजा खुशी मना रहे होते थे जो कि ठीक नहीं थी आज भी यह चिंता का विषय है जब महाराणा प्रताप हल्दीघाटी की लड़ाई लड़ रहे थे तो समय जयपुर जोधपुर बीकानेर बूंदी के लोग तमाशा देख रहे थे यदि ऐसा ही होता रहा तो देश विषम परिस्थितियों में हो जाएगा और हमारा जीना मुश्किल हो जाएगा बहन बेटियों की इज्जत बचाना भी हमारे लिए बहुत मुश्किल हो जाएगा आज हमें समय की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए और उसी का मंथन चिंतन करना चाहिए तथा उन समस्याओं का निदान करना चाहिए तभी भारत सशक्त हो सकता है हमें सूर्य और जल से सीखना चाहिए जिस प्रकार सूर्य में सूर्य का तेज छिपा हुआ है और वह अलग नहीं हो सकता जल सेजल की लहरों को अलग नहीं किया जा सकता है इसी प्रकार से भारत वासियों के अंदर से भारतीयता खत्म नहीं होनी चाहिए हिंदुत्व को समझना चाहिए और हिंदूवादी सोच पर चलना चाहिए व्हाट्सएप की चाय गुलाब और गुड मॉर्निंग से बचने में ही फायदा है प्रत्यक्ष वालों से संवाद करने में भलाई है प्यार दो प्यार प्राप्त करो सम्मान दो सम्मान प्राप्त करो उक्त विचार डॉक्टर एमपी सिंह के अपने स्वतंत्र विचार हैं

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